सामवेद (अध्याय 16)
पवस्व देववीतय इन्दो धाराभिरोजसा । आ कलशं मधुमान्त्सोम नः सदः ॥ (४)
हे सोम! आप मधुरतायुक्त हैं. आप देवताओं की तृप्ति के लिए अपनी ओजयुक्त धाराओं से सदैव हमारे कलशों में आइए. (४)
O Mon! You are sweet. Always come to our urns with your energetic streams for the satisfaction of the gods. (4)