हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.11.4

अध्याय 16 → खंड 11 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 11
पवस्व देववीतय इन्दो धाराभिरोजसा । आ कलशं मधुमान्त्सोम नः सदः ॥ (४)
हे सोम! आप मधुरतायुक्त हैं. आप देवताओं की तृप्ति के लिए अपनी ओजयुक्त धाराओं से सदैव हमारे कलशों में आइए. (४)
O Mon! You are sweet. Always come to our urns with your energetic streams for the satisfaction of the gods. (4)