हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.11.5

अध्याय 16 → खंड 11 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 11
तव द्रप्सा उदप्रुत इन्द्रं मदाय वावृधुः । त्वां देवासो अमृताय कं पपुः ॥ (५)
हे सोम! आप का रस जल से ओतप्रोत है. आप को इंद्र का यश और आनंद बढ़ाने के लिए उन्हें पिलाया जाता है. देवगण अमरता के लिए आप को पीते हैं. (५)
O Mon! Your juice is filled with water. You are fed to Indra to increase his fame and joy. Devgans drink you for immortality. (5)