सामवेद (अध्याय 16)
आ नः सुतास इन्दवः पुनाना धावता रयिम् । वृष्टिद्यावो रीत्यापः स्वर्विदः ॥ (६)
हे सोम! आप आत्मज्ञाता, रसीले और यजमान के लिए बादलों से पानी बरसाने की भांति धन बरसाने वाले हैं. आप हमारे लिए वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (६)
O Mon! You are going to shower money like raining water from the clouds for self-knowledge, succulent and host. Please give us splendour. (6)