सामवेद (अध्याय 16)
द्विर्यं पञ्च स्वयशसँ सखायो अद्रिसँहतम् । प्रियमिन्द्रस्य काम्यं प्रस्नापयन्त ऊर्मयः ॥ (८)
सोमरस पत्थरों से कूट कर निकाला जाता है. इन्हें दोनों हाथों की दस अंगुलियां साफ करती हैं और जलमय बनाती हैं. ये तरंगों की तरह लहराते हैं. ये सभी को प्रिय, सभी के मित्र और इंद्र के काम्य (चाहे गए) हैं. (८)
Somers is crushed with stones. Ten fingers of both hands clean them and make them watery. They wave like waves. They are dear to all, friends of all and kamya (wanted) of Indra. (8)