सामवेद (अध्याय 16)
इन्द्राय सोम पातवे वृत्रघ्ने परि षिच्यसे । नरे च दक्षिणावते वीराय सदनासदे ॥ (९)
हे सोम! आप वृत्रनाशक इंद्र के लिए द्रोणकलश में स्थित रहिए. आप यज्ञ में दक्षिणा देने वाले और यज्ञकर्ता यजमान के लिए मटके में बने रहिए व स्थिर रहिए. (९)
O Mon! You stay in Dronakalash for the vritrasankar indra. You should remain in the matka for the yagna giving dakshina and yajnakar yajaman in the yajna and remain stable. (9)