हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.11.9

अध्याय 16 → खंड 11 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 11
इन्द्राय सोम पातवे वृत्रघ्ने परि षिच्यसे । नरे च दक्षिणावते वीराय सदनासदे ॥ (९)
हे सोम! आप वृत्रनाशक इंद्र के लिए द्रोणकलश में स्थित रहिए. आप यज्ञ में दक्षिणा देने वाले और यज्ञकर्ता यजमान के लिए मटके में बने रहिए व स्थिर रहिए. (९)
O Mon! You stay in Dronakalash for the vritrasankar indra. You should remain in the matka for the yagna giving dakshina and yajnakar yajaman in the yajna and remain stable. (9)