हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.4.2

अध्याय 16 → खंड 4 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 4
एष पवित्रे अक्षरत्सोमो देवेभ्यः सुतः । विश्वा धामान्याविशन् ॥ (२)
सोमरस अमर व पवित्र है. वह देवताओं और उन की पीढ़ियों के लिए झरता है. यह छन कर उन में (देवताओं में) व्याप्त हो जाता है. (२)
Someras is immortal and holy. He springs to the gods and generations of them. It filters and pervades them (gods). (2)