हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.4.5

अध्याय 16 → खंड 4 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 4
एष सूर्यमरोचयत्पवमानो अधि द्यवि । पवित्रे मत्सरो मदः ॥ (५)
स्वर्गलोक पवित्रकारी है. सोमरस स्वर्गलोक में आनंद देने वाला है. पवित्र और छाना हुआ सोमरस सूर्य को प्रकाशित करने की सामर्थ्य रखता है. (५)
Heaven is holy. Someras is the one who gives joy in heaven. The holy and filtered Somerus has the power to illuminate the sun. (5)