हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.7.3

अध्याय 16 → खंड 7 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 7
पावमानीः स्वस्त्ययनीः सुदुघा हि घृतश्चुतः । ऋषिभिः सम्भृतो रसो ब्राह्मणेष्वमृतँ हितम् ॥ (३)
ऋषियों ने जो मंत्र रचे हैं, वे मंत्र ब्राह्मणों के लिए अमृत सरीखे कल्याणकारी, हितकारी वची से चुए हुए हैं. वे स्नेह की धाराओं से सने हुए और श्रेष्ठ फलदायी हैं. (३)
The mantras composed by the sages are soaked in welfare, beneficial vachi like nectar for Brahmins. They are adorned with streams of affection and are superiorly fruitful. (3)