सामवेद (अध्याय 16)
पावमानीः स्वस्त्ययनीस्ताभिर्गच्छति नान्दनम् । पुण्याँश्च भक्षान्भक्षयत्यमृतत्वं च गच्छति ॥ (६)
जो यजमान पवित्रतादायी मंत्रों से प्रेरणा लेता है, जो यजमान हितकारी मंत्रों में रुझान रखता है, वह परमानंद का भागी होता है. वह पुण्य अर्जित कराने वाले अन्न को खाता है और अमरता का भागीदार होता है. (६)
The host who takes inspiration from holy mantras, the host who is interested in beneficial mantras, is a part of ecstasy. He eats the food that earns virtue and is a partner of immortality. (6)