सामवेद (अध्याय 16)
अगन्म महा नमसा यविष्ठं यो दीदाय समिद्धः स्वे दुरोणे । चित्रभानुँ रोदसी अन्तरुर्वी स्वाहुतं विश्वतः प्रत्यञ्चम् ॥ (१)
हे अग्नि! कौन सी ऐसी जगह है, जहां आप नहीं जा सकते? आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक में भलीभांति प्रज्वलित (प्रकाशित) होते हैं. आप खूब प्रकाशवान, अच्छी आहुतियों वाले व युवा हैं. हम आप को नमस्कार करते हैं और आप की शरण में हैं. (१)
O agni! What's the place you can't go to? You are well illuminated in heaven and earth. You are very light, good-hearted and young. We greet you and are in your shelter. (1)