सामवेद (अध्याय 16)
प्रजामृतस्य पिप्रतः प्र यद्भरन्त वह्नयः । विप्रा ऋतस्य वाहसा ॥ (६)
दिव्य अग्नियां आकाश में भर जाती हैं. वे तीव्र गति से इंद्र को यज्ञ स्थान पर पहुंचा देती हैं. तब ब्राह्मणगण उन की स्तुति करते हैं. (६)
Divine agnis fill the sky. She takes Indra to the yajna place at a fast pace. Then the Brahmins praise him. (6)