सामवेद (अध्याय 16)
पवमानस्य जिघ्नतो हरेश्चन्द्रा असृक्षत । जीरा अजिरशोचिषः ॥ (१)
हे सोम! आप हरे हैं. आप के रस की धारा प्रसन्रतादायक है. वह छन कर और साफ हो कर झरती है. आप शत्रुनाशक हैं और सब जगह जा सकते हैं. (१)
O Mon! You're green. Your stream of juice is gratifying. She filters and cleans. You are an enemy destroyer and can go everywhere. (1)