सामवेद (अध्याय 16)
पवमानो रथीतमः शुभ्रेभिः शुभ्रशस्तमः । हरिश्चन्द्रो मरुद्गणः ॥ (२)
हे सोम! आप पवित्र, उच्चतम स्थान पर शोभित, उज्ज्वलतर से उज्ज्वलतम, हरित शोभा वाले व सब को प्रसन्नता देने वाले हैं. आप को पुष्ट बनाने में मरुद्गण भी आप की सहायता करते हैं. (२)
O Mon! You are holy, adorned in the highest place, brightest to brightest, green beauty and happy to everyone. Maruds also help you to strengthen you. (2)