सामवेद (अध्याय 17)
इन्द्रस्ते सोम सुतस्य पेयात्क्रत्वे दक्षाय विश्वे च देवाः ॥ (१३)
हे सोम! आप अपने पुत्रों की प्रार्थना सुन लीजिए. यज्ञ में इंद्र व सभी देवता आप के रस को पीने की कृपा करें. (१३)
O Mon! Listen to the prayers of your sons. In the yajna, Indra and all the gods should be pleased to drink your juice. (13)