सामवेद (अध्याय 17)
एवामृताय महे क्षयाय स शुक्रो अर्ष दिव्यः पीयूषः ॥ (१२)
हे सोम! आप चमकीले, दिव्य, अमृतमय और अमरता के लिए पृथ्वी पर क्षरित (प्रवाहित) होने की कृपा कीजिए. (१२)
O Mon! Please be bright, divine, elixirious and flow on the earth for immortality. (12)