हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 18.3.4

अध्याय 18 → खंड 3 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 18)

सामवेद: | खंड: 3
अस्य प्रेषा हेमना पूयमानो देवो देवेभिः समपृक्त रसम् । सुतः पवित्रं पर्येति रेभन्मितेव सद्म पशुमन्ति होता ॥ (४)
यजमान के पशु आदि वाले घर में प्रवेश करने के समान कूट व छान कर तैयार किया हुआ सोमरस द्रोणकलश में प्रवेश करता है. प्रकाशमान सोमरस स्वर्ण के समान कांतिमान है और प्रकाशमान वह देवताओं से मिलता है. (४)
Somers, prepared by digging and filtering, enters the dronalash like entering the house of the host's animal etc. The luminous Someras is as bright as gold and the luminous one meets the gods. (4)