सामवेद (अध्याय 18)
भद्रा वस्त्रा समन्याऽऽ३ वसानो महान्कविर्निवचनानि शँसन् । आ वच्यस्व चम्वोः पूयमानो विचक्षणो जागृविर्देववीतौ ॥ (५)
हे सोम! आप जाग्रत, विलक्षण, महान, कवि, अनिवर्चनीय, प्रशंसित एवं कल्याणकारी हैं. आप वीरता से समन्वित (युक्त) हैं. आप पवित्र बरतनों में प्रवेश कीजिए. (५)
O Mon! You are awake, extraordinary, great, poet, unspeakable, admired and benevolent. You are heroically coordinated. You enter the holy utensils. (5)