सामवेद (अध्याय 18)
समु प्रियो मृज्यते सानो अव्ये यशस्तरो यशसां क्षैतो अस्मे । अभि स्वर धन्वा पूयमानो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥ (६)
हे सोम! क्षिति (पृथ्वी) पर प्रकट हों आप यशस्तियों में यशवान, छका देने वाले और पवित्र हैं. हे यजमानो! आप सब स्वस्ति वचनों से सदैव उच्च स्वर से प्रार्थनाएं करते हुए सोम की स्तुति कीजिए. (६)
O Mon! Appear on the horizon (earth) You are successful, deceiving and holy in the fame. O hosts! All of you always pray with a loud voice with swasti words and praise Soma. (6)