सामवेद (अध्याय 19)
घृतं पवस्व धारया यज्ञेषु देववीतमः । अस्मभ्यं वृष्टिमा पव ॥ (३)
हे सोम! आप देवताओं द्वारा चाहे गए घृत की पवित्र धाराएं चुआइए. आप हमारे लिए मूसलाधार बरसात कीजिए. (३)
O Mon! You should choose the holy streams of ghrit desired by the gods. You rain heavily for us. (3)