सामवेद (अध्याय 19)
स न ऊर्जे व्या३व्ययं पवित्रं धाव धारया । देवासः शृणवन्हि कम् ॥ (४)
हे सोम! आप हमें ऊर्जा प्रदान कीजिए. आप अव्यय व पवित्र धारावान हैं. आप धाराओं से दौड़ कर कलश में प्रवेश कीजिए. आप की आवाज सुन कर देवतागण आनंदित हों. (४)
O Mon! You give us energy. You are unlovable and holy. You run through the streams and enter the urn. May the gods rejoice to hear your voice. (4)