हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 19.2.1

अध्याय 19 → खंड 2 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 19)

सामवेद: | खंड: 2
बभ्रवे नु स्वतवसेऽरुणाय दिविस्पृशे । सोमाय गाथमर्चत ॥ (१)
हे यजमानो! सोम ललाई वाले भूरे और शक्तिमान हैं. वे स्वर्गलोक को स्पर्श करते हैं. आप उन दिव्य सोम की उपासना कीजिए. (१)
O hosts! Som is brown and powerful with lalai. They touch heaven. You worship that divine Soma. (1)