सामवेद (अध्याय 19)
बभ्रवे नु स्वतवसेऽरुणाय दिविस्पृशे । सोमाय गाथमर्चत ॥ (१)
हे यजमानो! सोम ललाई वाले भूरे और शक्तिमान हैं. वे स्वर्गलोक को स्पर्श करते हैं. आप उन दिव्य सोम की उपासना कीजिए. (१)
O hosts! Som is brown and powerful with lalai. They touch heaven. You worship that divine Soma. (1)