हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 19.2.4

अध्याय 19 → खंड 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 19)

सामवेद: | खंड: 2
अमित्रहा विचर्षणिः पवस्व सोम शं गवे । देवेभ्यो अनुकामकृत् ॥ (४)
हे सोम! आप पवित्र हैं. आप सब कुछ देखने वाले हैं. आप देवताओं के लिए उन की इच्छानुसार काम करने वाले हैं. आप शत्रुहंता हैं. आप हमारी गायों के लिए सुखशांति प्रदान कीजिए. (४)
O Mon! You are holy. You're going to see everything. You are going to work for the gods as they wish. You are enemies. You give peace and tranquility for our cows. (4)