हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 19.2.5

अध्याय 19 → खंड 2 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 19)

सामवेद: | खंड: 2
इन्द्राय सोम पातवे मदाय परि षिच्यसे । मनश्चिन्मनसस्पतिः ॥ (५)
इंद्र मन के मालिक हैं. वे मन में रमते हैं. ऐसे इंद्र के पीने के लिए, मद देने के लिए सोमरस परिष्कृत होता है. (५)
Indra is the master of the mind. They ruminate in the mind. For such Indra's drinking, someras is refined to give the item. (5)