हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 19.3.1

अध्याय 19 → खंड 3 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 19)

सामवेद: | खंड: 3
विभ्राड् बृहत्पिबतु सोम्यं मध्वायुर्दधद्यज्ञपतावविह्रुतम् । वातजूतो यो अभिरक्षति त्मना प्रजाः पिपर्ति बहुधा वि राजति ॥ (१)
सूर्य प्रकाशमान हैं. वे प्रजा का पालन करते हैं, यजमान को निरोग बनाते हैं, लंबी आयु देते हैं, हवा बहाते हैं व सब के रक्षक हैं. इंद्र कई रूपों में सुशोभित हो रहे हैं. वे भरपूर सोमपान करें. (१)
The sun is shining. They follow the people, make the host healthy, give long life, blow wind and are the protectors of all. Indra is adorned in many forms. They should drink a lot. (1)