हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 2.10.7

अध्याय 2 → खंड 10 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 2)

सामवेद: | खंड: 10
धानावन्तं करम्भिणमपूपवन्तमुक्थिनम् । इन्द्र प्रातर्जुषस्व नः ॥ (७)
हे इंद्र! दही और भुजे हुए सत्तुओं वाले यज्ञ के पुरोडाश (प्रसाद) की हवि हम मंत्र के साथ समर्पित कर रहे हैं. आप इस सोम को प्रात:काल ग्रहण कीजिए. (७)
O Indra! We are dedicating the purodash (prasad) of the yajna containing curd and roasted sattus with a mantra. You take this Mon in the morning. (7)