सामवेद (अध्याय 2)
अपां फेनेन नमुचेः शिर इन्द्रोदवर्तयः । विश्वा यदजय स्पृधः ॥ (८)
जब डाह करने वाली राक्षसों की सारी सेना को इंद्र ने हरा दिया तब आप ने जल के झाग से नमुचि राक्षस का सिर तोड़ (काट) दिया. (८)
When Indra defeated the entire army of jealous demons, then you broke the head of namuchi rakshasa with the foam of water. (8)