हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 2.6.1

अध्याय 2 → खंड 6 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 2)

सामवेद: | खंड: 6
इदँ ह्यन्वोजसा सुतँ राधानां पते । पिबा त्वा३स्य गिर्वणः ॥ (१)
हे इंद्र! आप धन के स्वामी हैं. आप प्रार्थना करने योग्य हैं. हम ने बहुत मेहनत से आप के लिए सोमरस निचोड़ा है. आप रुचिपूर्वक इसे ग्रहण कीजिए. (१)
O Indra! You are the master of wealth. You deserve to pray. We have squeezed somers for you very hard. You accept it with interest. (1)