सामवेद (अध्याय 2)
ईङ्खयन्तीरपस्युव इन्द्रं जातमुपासते । वन्वानासः सुवीर्यम् ॥ (१)
इंद्र की माता उत्तम बल चाहने वाली हैं. वे श्रेष्ठ कार्य करने की इच्छुक हैं. वे इंद्र से वीरतापूर्ण धन चाहती हैं. वे प्रकट हुए इंद्र की सेवा करती हैं. (१)
Indra's mother is a great force seeker. They are willing to do the best. They want heroic wealth from Indra. She serves the appeared Indra. (1)
सामवेद (अध्याय 2)
न कि देवा इनीमसि न क्या योपयामसि । मन्त्रश्रुत्यं चरामसि ॥ (२)
हे इंद्र! हम वेद मंत्रों के अनुसार आचरण करते हैं. हम किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. हम धर्म (नियम) के विरुद्ध कोई काम नहीं करते हैं. (२)
O Indra! We behave according to Veda mantras. We don't harm anyone. We don't do anything against dharma (rules). (2)
सामवेद (अध्याय 2)
दोषो आगाद्बृहद्गाय द्युमद्गामन्नाथर्वण । स्तुहि देवँ सवितारम् ॥ (३)
हे बृहत्साम का गायन करने वाले, प्रकाश वाले मार्ग से जाने वाले अथर्ववेदी ब्राह्मण! आप यज्ञ कार्य से जाने अनजाने होने वाले दोष को दूर करने के लिए सविता देवता की स्तुति कीजिए. (३)
O Atharvavedi Brahmin who sings Brihatsam, who goes through the path of light! Praise Savita Devta to remove the defect that you know from the yajna work. (3)
सामवेद (अध्याय 2)
एषो उषा अपूर्व्या व्युच्छति प्रिया दिवः । स्तुषे वामश्विना बृहत् ॥ (४)
यह उषा अपूर्व और बहुत प्रसन्नता देने वाली है. यह स्वर्गलोक से आ कर अंधकार का नाश करती है. हे उषा के कार्य सहयोगी अश्विनीकुमारो! हम आप की विशेष स्तुति करते हैं. (४)
This Usha is unique and very happy. It comes from heaven and destroys darkness. O Usha's work associate Ashwinikumaro! We specially praise you. (4)
सामवेद (अध्याय 2)
इन्द्रो दधीचो अस्थभिर्वृत्राण्यप्रतिष्कुतः । जघान नवतीर्नव ॥ (५)
हे इंद्र! आप को कोई नहीं जीत सकता. आप ने दधीचि की हड्डियों से बने वज्र से निन्यानवे असुरों का नाश किया. (५)
O Indra! No one can win you. You destroyed ninety-nine asuras with a thunderbolt made from Dadhichi's bones. (5)
सामवेद (अध्याय 2)
इन्द्रेहि मत्स्यन्धसो विश्वेभिः सोमपर्वभिः । महाँ अभिष्टिरोजसा ॥ (६)
हे इंद्र! आप सोमरस के रूप में अन्न ग्रहण कीजिए व प्रसन्न होइए. हमारे यहां पधारिए. अपनी शक्ति से हमें शक्तिमान बनाइए. शत्रुओं को जीतने की शक्ति दीजिए. (६)
O Indra! You take food in the form of someras and be happy. Come to our place. Make us powerful with your power. Give the enemies the power to win. (6)
सामवेद (अध्याय 2)
आ तू न इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि । महान्महीभिरूतिभिः ॥ (७)
हे इंद्र! आप शत्रुनाशक व बहुत महान हैं. आप हमारे पास जल्दी आइए. आप अपने रक्षा साधनों के साथ शीघ्र हमारे यहां पधारिए. (७)
O Indra! You are hostile and very great. You come to us soon. You come to our place soon with your defense equipment. (7)
सामवेद (अध्याय 2)
ओजस्तदस्य तित्विष उभे यत्समवर्तयत् । इन्द्रश्चर्मेव रोदसी ॥ (८)
हे इंद्र! आप का बल प्रकट होने लगा है. आप स्वर्गलोक और पृथ्वी को चमड़े के समान फैला रहे हैं. (८)
O Indra! Your force is beginning to appear. You are spreading paradise and earth like leather. (8)