सामवेद (अध्याय 21)
उत्ते बृहन्तो अर्चयः समिधानस्य दीदिवः । अग्ने शुक्रास ईरते ॥ (७)
हे अग्नि! हम समिधाओं से आप को प्रज्वलित करते हैं. हमारी अधिक अर्चना से आप ज्चालाओं से बढ़ोतरी प्राप्त करते हैं. (७)
O agni! We ignite you with samidhas. With more of our archana, you get an increase from the hikes. (7)