हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 21.1.8

अध्याय 21 → खंड 1 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 21)

सामवेद: | खंड: 1
उप त्वा जुह्वो३ मम घृताचीर्यन्तु हर्यत । अग्ने हव्या जुषस्व नः ॥ (८)
हे अग्नि! हमारी घी से भरी हुई हवि आप का मन हरे. वह आप तक पहुंचे. हे अग्नि! आप हमारी उपासना को स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (८)
O agni! Our ghee-filled havi is green in your mind. He reached out to you. O agni! Please accept our worship. (8)