सामवेद (अध्याय 22)
यो विश्वा दयते वसु होता मन्द्रो जनानाम् । मधोर्न पात्रा प्रथमान्यस्मै प्र स्तोमा यन्त्वग्नये ॥ (११)
हे अग्नि! आप धनदाता, होता व आनंददाता हैं. सोमरस से भरे पात्र आप तक पहुंचें सर्वप्रथम हम आप की स्तुति करते हैं. वे स्तुतियां भी आप तक पहुंचें. (११)
O agni! You are a wealth giver, a hota and a joy giver. Let the characters full of somers reach you First of all we praise you. Those praises also reach you. (11)