हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 22.1.10

अध्याय 22 → खंड 1 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 1
त्वं पुरू सहस्राणि शतानि च यूथा दानाय मँहसे । आ पुरन्दरं चकृम विप्रवचस इन्द्रं गायन्तोऽवसे ॥ (१०)
हे इंद्र! आप सैकड़ोंहजारों गायों के झुंड देने व शत्रु नगरियों को नष्ट करने की सामर्थ्य रखते हैं. यजमान अपनी रक्षा के लिए साम मंत्र गा रहे हैं. इंद्र ब्राह्मणों के वचनों से युक्त हैं. हम उन को आमंत्रित करते हैं. (१०)
O Indra! You have the ability to give herds of hundreds of thousands of cows and destroy enemy cities. The host is singing saam mantra to protect themselves. Indra is endowed with the words of Brahmins. We invite them. (10)