हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृडय । त्वामवस्युरा चके ॥ (१)
हे वरुण! आप हमारी इन स्तुतियों पर कान (ध्यान) दीजिए. आप हमें सुख दीजिए. हम आप से अपनी रक्षा की प्रार्थना करते हैं. (१)
O Varuna! You pay attention to these praises of ours. You give us happiness. We pray to you to protect us. (1)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
कया त्वं न ऊत्याभि प्र मन्दसे वृषन् । कया स्तोतृभ्य आ भर ॥ (२)
हे इंद्र! आप किन साधनों से हमारी रक्षा करते हैं? आप हमें किस प्रकार बहुत प्रसन्नता देते हैं? आप कैसे यजमानों (स्तोताओं) की इच्छापूर्ति करते हैं? (२)
O Indra! By what means do you protect us? How do you make us very happy? How do you fulfill the wishes of the hosts?¦ (2)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे । इन्द्रँ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये ॥ (३)
हे इंद्र! हम यज्ञ में व वीर भक्तगण संग्राम में आप को आमंत्रित करते हैं. हम धन हेतु आप का आह्वान करते हैं. (३)
O Indra! We invite you to the yagna and the brave devotees to the struggle. We call on you for money. (3)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
इन्द्रो मह्ना रोदसी पप्रथच्छव इन्द्रः सूर्यमरोचयत् । इन्द्रे ह विश्वा भुवनानि येमिर इन्द्रे सुवानास इन्दवः ॥ (४)
हे इंद्र! आप महान हैं. आप ने स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक का फैलाव किया. आप ने सूर्य को प्रकाश से चमकाया. आप ने सकल भुवनों को शरण दी. हम आप के लिए सोमरस भेंट करते हैं. (४)
O Indra! You are great. You spread paradise and earth. You made the sun shine with light. You gave shelter to the sakal bhuvanas. We present somers to you. (4)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
विश्वकर्मन्हविषा वावृधानः स्वयं यजस्व तन्वा३ँ स्वा हि ते । मुह्यन्त्वन्ये अभितो जनास इहास्माकं मघवा सूरिरस्तु ॥ (५)
हे इंद्र! आप हवि से बढ़ोतरी पाते हैं. आप सभी कर्म साधते हैं. हम संसार के कल्याण के लिए अपने को न्योछावर करते हैं. यज्ञ से विरोध रखने वाले लोगों का मनोबल टूटे. इंद्र हमारे हो जाएं. बुद्धिजीवी लोग हमारे हो जाएं. (५)
O Indra! You get an increase from the havi. You do all the deeds. We sacrifice ourselves for the welfare of the world. The morale of the people who are opposed to the yajna was broken. Indra become ours. Intellectuals should become ours. (5)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
अया रुचा हरिण्या पुनानो विश्वा द्वेषाँसि तरति सयुग्वभिः सूरो न सयुग्वभिः । धारा पृष्ठस्य रोचते पुनानो अरुषो हरिः । विश्वा यद्रूपा परियास्यृक्वभिः सप्तास्येभिरृक्वभिः ॥ (६)
हे सोम! आप का रस रुचिपूर्ण है व हरित आभा वाला है. आप उस से द्वेषियों का वैसे ही संहार करते हैं, जैसे सूर्य अपनी किरणों से अंधेरे का संहार करते हैं. आप का रस प्रकाशमान है. छलनी पर आप की धारा प्रकाशमान है. आगेपीछे सब ओर आप की धारा शोभित होती है. आप अपने सात मुखों से निकलने वाली सात किरणों से कहीं ज्यादा प्रकाशमान व उत्तम हैं. (६)
O Mon! Your juice is interesting and has a green aura. You kill haters like the sun kills darkness with its rays. Your juice is shining. The stream of you on the sieve is illuminating. Your stream is adorned all over the back. You are brighter and better than the seven rays emanating from your seven mouths. (6)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
प्राचीमनु प्रदिशं पाति चेकितत्सँ रश्मिभिर्यतते दर्शतो रथो दैव्यो दर्शतो रथः । अग्मन्नुक्थानि पौँस्येन्द्रं जैत्राय हर्षयत । वज्रश्च यद्भवथो अनपच्युता समत्स्वनपच्युता ॥ (७)
हे सोम! आप पूर्व दिशा में प्रस्थान करते हैं. तब आप का रथ बहुत चमकता है. आप का रथ दिव्य व दर्शनीय है. यजमान मंत्र गागा कर अपनी स्तुतियां आप और इंद्र तक पहुंचाते हैं. यजमान विजय पाने की इच्छा से आप को प्रसन्न करते हैं. वे आप से वज्ज प्राप्त करते हैं. आप दोनों मिल कर किसी भी युद्ध में यजमान को हारने नहीं देते हैं. (७)
O Mon! You depart in the east direction. Then your chariot shines a lot. Your chariot is divine and visible. The host conveys his praises to you and Indra by singing the mantra. The host pleases you with the desire to win. They get a joke from you. You both do not let the host lose in any war together. (7)

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 2
त्वं ह त्यत्पणीनां विदो वसु सं मातृभिर्मर्जयसि स्व आ दम ऋतस्य धीतिभिर्दमे । परावतो न साम तद्यत्रा रणन्ति धीतयः । त्रिधातुभिररुषीभिर्वयो दधे रोचमानो वयो दधे ॥ (८)
हे सोम! आप ने व्यापारियों से धन पाया. आप मातृ जल से पवित्र किए जाते हैं. आप के लिए गाए जाने वाले सामगान यज्ञ स्थान से बहुत दूर दूर तक गूंजते हैं. आप स्वर्गलोक, अंतरिक्षलोक एवं पृथ्वीलोक तीनों ही जगह सुशोभित होते हैं. आप हमें दीर्घायु कीजिए. (८)
O Mon! You got money from traders. You are sanctified with mother water. The songs sung for you resonate far away from the yajna place. You are adorned in all three places heaven, space world and earth. You make us long. (8)