सामवेद (अध्याय 22)
इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे । इन्द्रँ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये ॥ (३)
हे इंद्र! हम यज्ञ में व वीर भक्तगण संग्राम में आप को आमंत्रित करते हैं. हम धन हेतु आप का आह्वान करते हैं. (३)
O Indra! We invite you to the yagna and the brave devotees to the struggle. We call on you for money. (3)