सामवेद (अध्याय 22)
उत नो गोषणिं धियमश्वसां वाजसामुत । नृवत्कृणुह्यूतये ॥ (१)
हे पूषा! आप हमारी बुद्धि की रक्षा कीजिए. हमारी बुद्धि हमें गोधन, अश्वधन व धन प्राप्त कराती है. (१)
O Pusha! You protect our intellect. Our intellect gives us wealth, horsepower and wealth. (1)