सामवेद (अध्याय 22)
शशमानस्य वा नरः स्वेदस्य सत्यशवसः । विदा कामस्य वेनतः ॥ (२)
हे मरुद्गण! सत्य हमारा बल है. हम यज्ञ करते हुए पसीने से तर हो गए हैं. आप ऐसे उपासकों की मनोकामनाएं पूरी करने की कृपा कीजिए. (२)
O Desertion! Truth is our force. We have become sweaty while performing yagna. Please fulfill the wishes of such worshippers. (2)