सामवेद (अध्याय 22)
प्र वां महि द्यवी अभ्युपस्तुतिं भरामहे । शुची उप प्रशस्तये ॥ (४)
हे स्वर्गलोक! हे पृथ्वीलोक! हम स्तुतियों से आप के समीप पहुंचते हैं. हम आप दोनों लोकों के लिए भरपूर स्तुतियां उचारते हैं. (४)
O paradise! O earth! We come close to you by praise. We offer a lot of praise to both of you. (4)