हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 22.3.5

अध्याय 22 → खंड 3 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 3
पुनाने तन्वा मिथः स्वेन दक्षेण राजथः । ऊह्याथे सनादृतम् ॥ (५)
हे देवी! आप स्वर्गलोक व पृथ्वीलोक को पवित्र करती हैं. आप प्रकाशवती हैं. आप यज्ञ की परिपाटियों का निर्वाह करती हैं. (५)
O Goddess! You sanctify heaven and earth. You are prakashvati. You follow the practices of yajna. (5)