हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 22.3.8

अध्याय 22 → खंड 3 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 3
स्तोत्रँ राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते । विभूतिरस्तु सूनृता ॥ (८)
हे इंद्र! आप धनों के स्वामी व वीर हैं. आप वाणी से स्तुति योग्य, अच्छे ऋत (सत्य) वाले और वैभववान हैं. (८)
O Indra! You are the master of wealth and the hero. You are praiseworthy of speech, good truth and glorious. (8)