सामवेद (अध्याय 22)
स्तोत्रँ राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते । विभूतिरस्तु सूनृता ॥ (८)
हे इंद्र! आप धनों के स्वामी व वीर हैं. आप वाणी से स्तुति योग्य, अच्छे ऋत (सत्य) वाले और वैभववान हैं. (८)
O Indra! You are the master of wealth and the hero. You are praiseworthy of speech, good truth and glorious. (8)