सामवेद (अध्याय 22)
अयमु ते समतसि कपोत इव गर्भधिम् । वचस्तच्चिन्न ओहसे ॥ (७)
हे इंद्र! हमारी स्तुतियां स्नेह से आप के पास उसी तरह पहुंचती हैं, जैसे कबूतर प्रेम से कबूतरी के पास पहुंचता है. (७)
O Indra! Our praises reach you with affection in the same way as a pigeon reaches the pigeon with love. (7)