हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 22.4.3

अध्याय 22 → खंड 4 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 22)

सामवेद: | खंड: 4
इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम । पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितोऽभि स्तोमैरनूषत ॥ (३)
हे इंद्र! हमारी स्तुतियां आप का यशवर्धन करें. हमारी स्तुतियां श्रेष्ठ ज्ञानमय हैं. ज्ञानी और तेजस्वी यजमान आप की स्तुति करते हैं. (३)
O Indra! May our praises bring you laurels. Our praises are of great knowledge. The wise and bright host praises you. (3)