हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.1.3

अध्याय 23 → खंड 1 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 1
प्रियो नो अस्तु विश्पतिर्होता मन्द्रो वरेण्यः । प्रियाः स्वग्नयो वयम् ॥ (३)
अग्नि हमें प्रिय हैं. वे विश्वपति, होता और वरेण्य हैं. उन्हें हम सब प्रिय हों. (३)
Agni is dear to us. They are Vishwapati, Hota and Varenya. May we all be dear to them. (3)