सामवेद (अध्याय 23)
त्यमु वः सत्रासाहं विश्वासु गीर्ष्वायतम् । आ च्यावयस्यूतये ॥ (४)
हे इंद्र! आप शत्रुओं को एक साथ मारते हैं. हम अपनी रक्षा के लिए स्तुतियों से आप को आमंत्रित करते हैं. (४)
O Indra! You kill enemies together. We invite you from eulogies to protect you. (4)