हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.3.5

अध्याय 23 → खंड 3 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 3
युध्मँ सन्तमनर्वाणँ सोमपामनपच्युतम् । नरमवार्यक्रतुम् ॥ (५)
हे इंद्र! आप युद्ध करते हुए कभी नहीं हारते. सोमपान के लिए आप का मन दृढ़ निश्चय वाला है. हम यज्ञ में आप का सहयोग चाहते हैं. (५)
O Indra! You never lose while fighting. Your mind is determined for Sompan. We want your cooperation in the yagna. (5)