हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.2.14

अध्याय 24 → खंड 2 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 2
कस्तमिन्द्र त्वावसो मर्त्यो दधर्षति । श्रद्धा इत्तेमघवन् पार्ये दिवि वाजी वाजं सिषासति ॥ (१४)
हे इंद्र! किस में इतनी सामर्थ्य है जो आप का तिरस्कार कर दे. आप ऐश्वर्यशाली हैं. आप के भक्त आप के प्रति श्रद्धा के कारण ही दुर्दिन में आप से शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त करते हैं. (१४)
O Indra! Who has the power to despise you? You are opulent. Your devotees get power and strength from you in bad days only because of their reverence for you. (14)