हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.2.15

अध्याय 24 → खंड 2 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 2
मघोनः स्म वृत्रहत्येषु चोदय ये ददति प्रिया वसु । तव प्रणीती हर्यश्व सूरिभिर्विश्वा तरेम दुरिता ॥ (१५)
हे इंद्र! आप ऐश्वर्यशाली और अश्ववान हैं. आप वृत्रासुर जैसे अत्याचारियों को नष्ट करने की शक्ति दीजिए. यजमानों को देने के लिए आप प्रिय धनों को प्रेरित कीजिए. शूरवीर और ज्ञानी आप की कृपा से पापों से छुटकारा पाएं. (१५)
O Indra! You are opulent and equestrian. You give power to destroy tyrants like Vritrasura. Inspire your beloved money to give to the hosts. Knight and wise, get rid of sins by the grace of you. (15)