हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.3.14

अध्याय 24 → खंड 3 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 3
दाना मृगो न वारणः पुरुत्रा चरथं दधे । न किष्ट्वा नि यमदा सुते गमो महाँश्चरस्योजसा ॥ (१४)
हे इंद्र! आप महान, विचरण कर्ता और आदरणीय हैं. आप अपने बल सहित यज्ञ में पधारने की कृपा कीजिए. आप को रथ ले कर यज्ञ में आने से भला कौन रोक सकता है? आप शत्रु को वैसे ही खोजते हैं, जैसे मतवाला हाथी अपने शत्रु को खोजता है. (१४)
O Indra! You are great, diabolical and respected. Please come to the yajna with your strength. Who can stop you from coming to the yagna with a chariot? You search for the enemy just as a drunk elephant searches for its enemy. (14)