हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.4.12

अध्याय 24 → खंड 4 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 4
अग्निः प्रियेषु धामसु कामो भूतस्य भव्यस्य । सभ्राडेको वि राजति ॥ (१२)
हे अग्नि! आप एकमात्र सम्राट्‌ हैं. आप अपने प्रिय धामों में सुशोभित होते हैं. आप अतीत और भविष्य में चाहने वालों की इच्छा पूरी करते हैं. (१२)
O agni! You are the only emperor. You are adorned in your favorite dhams. You fulfill the wishes of those who want in the past and future. (12)