सामवेद (अध्याय 24)
पवमाना दिवस्पर्यन्तरिक्षादसृक्षत । पृथिव्या अधि सानवि ॥ (२)
हे सोम! आप का रस पवित्र और वह स्वर्गलोक से धरती के उच्च शिखर को स्पर्श करता हुआ बहता है. (२)
O Mon! Your juice is pure and it flows from heaven touching the high peak of the earth. (2)