सामवेद (अध्याय 24)
पवमाना असृक्षत सोमाः शुक्रास इन्दवः । अभि विश्वानि काव्या ॥ (१)
हे सोम! आप का रस पवित्र व चमकीला है. उसे सभी काव्यों (वेद मंत्रों) के साथ संस्कारित किया जाता है. (१)
O Mon! Your juice is pure and bright. He is cultured with all the poems (Veda mantras). (1)